चीन ने बदला रक्षा कानून, भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
चीन अपनी युद्ध लड़ने की क्षमता बढ़ा रहा है. ऐसे में भारत को अगला सीमा संकट आने से पहले अपनी सैन्य तैयारियों की कमियों को दूर करना होगा

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
अगले हफ्ते नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने वाला है जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल होंगे. इसी बीच चीन ने अपने राष्ट्रीय रक्षा कानून में बड़ा बदलाव किया है. अब इस कानून के तहत चीन सरकार को देश की रक्षा के लिए आम लोगों के संसाधनों, उद्योगों, तकनीक, डेटा और सोसाइटी इस्तेमाल करने के ज्यादा अधिकार मिल गए हैं. 2010 में यह कानून लागू होने के बाद पहली बार इसमें इतने बड़े बदलाव किए गए हैं.
28 अगस्त को राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा की स्थाई समिति ने इस संशोधित कानून को मंजूरी दी. इसमें पहले की तरह 14 चैप्टर ही रहेंगे लेकिन अनुच्छेदों की संख्या 72 से बढ़कर 82 कर दी गई है. यह नया कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा.
इन बदलावों के बाद चीन के पास इस कानून का इस्तेमाल करने के ज्यादा अधिकार होंगे. अब इसमें देश की सुरक्षा, एकता और सीमा की रक्षा के साथ विकास से जुड़े हितों को भी शामिल किया गया है. यानी चीन सिर्फ सैन्य खतरे के समय ही नहीं बल्कि आर्थिक सुरक्षा, तकनीक, विदेशों में अपनी संपत्तियों और दूसरी जरूरी चीजों की सुरक्षा के लिए भी इस कानून का इस्तेमाल कर सकता है.
यह कानून सिर्फ दुश्मन के हमले के समय ही लागू नहीं होगा बल्कि चीन को अगर अपने हितों पर खतरा लगता है तो सरकार जरूरत के मुताबिक देश के लोगों और संसाधनों का इस्तेमाल कर सकती है.
नए कानून में टेलीकॉम, मीडिया, साइबर सुरक्षा और सूचना से जुड़ी सेवाओं को भी रक्षा से जोड़ दिया गया है. इसमें डेटा सिस्टम के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर ऑपरेशन और स्वचालित तकनीक को भी शामिल किया गया है. देश में आपात स्थिति आने पर सरकार टेलीकॉम नेटवर्क, डेटा सेंटर, डिजिटल प्लेटफॉर्म और मीडिया सिस्टम का इस्तेमाल सेना के काम, सूचना नियंत्रण और जरूरी जानकारी पहुंचाने के लिए कर सकती है.
नए कानून में कंपनियों के लिए नियम और सख्त किए गए हैं. सरकार कंपनियों से उपकरण, सामान, तकनीक, सॉफ्टवेयर और डेटा का स्टॉक रखने को कह सकती है. जरूरत पड़ने पर कंपनियों को अपने विशेषज्ञ कर्मचारियों को काम पर लगाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए भी तैयार रहना होगा. AI, ड्रोन, रोबोट और सैटेलाइट संचार जैसी नई तकनीकों को भी कानून में शामिल किया गया है. इसका मकसद यह है कि जरूरत पड़ने पर कारखानों, तकनीकी कंपनियों और बुनियादी ढांचा बनाने वाली कंपनियों को जल्दी से रक्षा से जुड़े काम में लगाया जा सके.
लोगों की जिम्मेदारियों को लेकर भी नियम साफ किए गए हैं. 18 से 60 साल के पुरुषों और 18 से 55 साल की महिलाओं को सैन्य काम, आपदा से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद के लिए लगाया जा सकता है. सरकार जरूरत पड़ने पर इमारतों, वाहनों और उपकरणों का इस्तेमाल अपने काम के लिए कर सकती है. इसके बदले मुआवजे और कुछ मामलों में छूट का प्रावधान भी है. खास बात यह है कि इसकी तैयारी शांति के समय से ही शुरू करनी होगी. कंपनियों को पहले से तैयार रहना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर वे तुरंत काम कर सकें.
ये बदलाव ऐसे समय में हुए हैं जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और चीन समेत कई देशों के बीच मुकाबला बढ़ रहा है और भारत-चीन सीमा पर भी सैन्य तनाव बना हुआ है. भारत के लिए चिंता की बात सिर्फ यह नहीं है कि चीन कम समय में कितने सैनिक जुटा सकता है बल्कि यह है कि वह अपनी आर्थिक और तकनीकी ताकत को लंबे समय तक सैन्य ताकत में बदलने की तैयारी कर रहा है.
2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव के बाद से भारत और चीन ने सीमा पर सड़कें और दूसरी सुविधाएं बढ़ाई हैं. दोनों देशों ने बड़ी संख्या में सैनिक भी तैनात कर रखे हैं. अगर संकट लंबे समय तक चलता है तो चीन लोगों, सामान, वाहनों और कारखानों के उत्पादन को तेजी से जुटा सकता है.
इससे दोनों देशों के बीच शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है. LAC पर संकट के दौरान सेना के लिए सामान पहुंचाने, सड़कों और संचार, गोला-बारूद, कारखानों में उत्पादन, सैटेलाइट, साइबर नेटवर्क और सूचना व्यवस्था पर एक साथ दबाव पड़ सकता है. चीन का नया कानून इन सभी चीजों को संकट शुरू होने से पहले ही तैयार रखने की कोशिश करता है.
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत की रक्षा योजना के लिए इसके मायने बहुत स्पष्ट हैं. देश को सशस्त्र बलों और निजी क्षेत्र समेत नागरिक उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है. साथ ही रणनीतिक भंडार बढ़ाने, ऐसी सप्लाई चेन तैयार करने की जरूरत है जो संकट के समय भी चलती रहें, रक्षा उत्पादन तेजी से बढ़ाने और संचार व जरूरी बुनियादी ढांचे को ज्यादा मजबूत बनाने की जरूरत है. साइबर सुरक्षा और सूचना तंत्र की मजबूती को सिर्फ नागरिक तकनीक से जुड़ी जरूरत नहीं बल्कि सैन्य अभियान की अहम जरूरत माना जाना चाहिए. भविष्य में होने वाले किसी भी टकराव में सैन्य नेटवर्क, जरूरी बुनियादी ढांचे, जनता तक पहुंचने वाली सूचना और पूरे सूचना तंत्र पर एक साथ दबाव डाला जा सकता है.
यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत को एक साथ चीन और पाकिस्तान से सैन्य चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. अगर चीन हिमालयी सीमा पर दबाव बनाते हुए लंबे समय तक अपनी तैयारी जारी रखता है तो भारत के सैन्य संसाधनों और रक्षा उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है.
बदले सुरक्षा माहौल में बिना सीधे युद्ध शुरू किए ही साइबर हमले, आर्थिक दबाव, तकनीक पर रोक, सूचना अभियान और सैन्य दबाव सब एकसाथ हो सकते हैं. किसी टकराव की शुरुआत इंटरनेट और दूसरे नेटवर्क में रुकावट, जरूरी बुनियादी ढांचे पर दबाव, सूचना अभियान या आर्थिक कदमों से हो सकती है और बाद में ये सैन्य संघर्ष में बदल सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग के रक्षा कानून में किया गया यह बदलाव सिर्फ सरकारी नियमों में बदलाव नहीं है. इससे पता चलता है कि मौजूदा समय में चीन अपनी ताकत को कैसे इस्तेमाल करना चाहता है. चीन अपनी सेना, उद्योग, तकनीक, अर्थव्यवस्था और सूचना से जुड़ी ताकत को एक ही कानूनी व्यवस्था के तहत एक साथ लाने की तैयारी कर रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को चीन के इस मॉडल की नकल करने की जरूरत नहीं है लेकिन भारत को यह समझना होगा कि चीन किस दिशा में आगे बढ़ रहा है. किसी संकट का लंबे समय तक सामना करने के लिए पहले से तैयारी करनी होगी, न कि संकट शुरू होने के बाद सिर्फ उसका जवाब देना होगा. इसके लिए देश में रक्षा सामग्री निर्माण बढ़ाना, सामान की सप्लाई को सुरक्षित रखना, सीमा पर सड़कें और दूसरी सुविधाएं बढ़ाना, जरूरी डिजिटल नेटवर्क को सुरक्षित रखना और देश की तकनीक व उद्योग की ताकत को रक्षा की तैयारियों से जोड़ना जरूरी है.
भविष्य में होने वाले संघर्ष सिर्फ इस बात से तय नहीं होंगे कि किस देश के पास बेहतर हथियार हैं. यह भी अहम होगा कि कौन अपने देश की ताकत को तेजी से जुटा सकता है, उसे ज्यादा समय तक बनाए रख सकता है और अलग-अलग क्षेत्रों में उसकी सुरक्षा कर सकता है. चीन के नए कानून से इस कोशिश को मजबूत कानूनी आधार मिला है. भारत को अगला संकट आने से पहले अपनी तैयारियों की कमियों को दूर करना होगा ताकि संकट आने पर वह बेहतर तरीके से उसका सामना कर सके.