अमेरिका में डेमोक्रेट्स के नए चेहरों के आगे 'ट्रंप' कार्ड फेल, अब क्या करेंगे डोनाल्ड?

अमेरिका में दोनों सदनों पर रिपब्लिकन्स का नियंत्रण लगभग खत्म. वहीं डेमोक्रेट्स ने युद्ध खत्म करने का वादा किया है. सीनेट में बहुमत के बाद वे बजट और युद्ध संबंधी अधिकारों के जरिए व्हाइट हाउस पर दबाव बना सकते हैं

मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की हार हुई

अमेरिका में चुनाव के दिन रिपब्लिकन पार्टी मजबूत स्थिति में थी. सीनेट में उसके पास 53-47 और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स) में 219-214 सीटों का बहुमत था लेकिन 4 नवंबर की सुबह ने सारे समीकरण बदल दिए. दोनों सदनों पर उसका नियंत्रण लगभग खत्म हो गया. कुछ चुनाव विश्लेषकों ने इसे वॉटरगेट कांड के बाद सत्तारूढ़ पार्टी की सबसे बड़ी हार बताया.

CBS, CNN और NBC समेत कई समाचार नेटवर्क ने डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों में जीत का अनुमान जताया. रिपोर्ट लिखे जाने तक सीनेट में डेमोक्रेट्स को 54 और रिपब्लिकन को 44 सीटें मिलती दिख रही थीं. नई कांग्रेस का सत्र 3 जनवरी से शुरू होगा. 

मतदाताओं ने देश की दिशा पर नाराजगी या असंतोष जताया. दो वर्षों से ईंधन, खाद्य पदार्थों और बीमा की बढ़ती कीमतों से उनकी जेब पर बोझ बढ़ रहा था. मंगलवार को उन्होंने अपने वोट से सत्ता को जवाब दे दिया. पूर्व राष्ट्रपति और डेमोक्रेट नेता बराक ओबामा ने ट्वीट कर लिखा, अमेरिकी जनता ने एक स्पष्ट संदेश दिया है, वे ऐसी राजनीति चाहते हैं जो लोगों को बांटने के बजाय जोड़ने का काम करे.

लाल दीवार में दरार

सीनेट चुनाव में डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन पार्टी की सात सीटें छीन लीं. इनमें टेक्सस, कंसास, दक्षिण कैरोलाइना, नॉर्थ कैरोलाइना, मेन, आयोवा और ओहायो शामिल हैं.

टेक्सास सबसे बड़ा उलटफेर साबित हुआ. 2024 में डोनाल्ड ट्रंप ने यहां जीत हासिल की थी और अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन का समर्थन किया था. पैक्सटन धोखाधड़ी के मामले में अभियोग का सामना कर चुके थे और राज्य की विधायिका उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया भी शुरू कर चुकी थी. इस बार डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स तालारिको ने उन्हें दोहरे अंकों से हराया. वे 55 फीसद वोटों के साथ 32 वर्षों में टेक्सस से राज्यव्यापी चुनाव जीतने वाले पहले डेमोक्रेट बने.

टेक्सस में जीत हासिल करने वाले 37 वर्षीय डेमोक्रेट नेता जेम्स तालारिको

कंसास में एडम हैमिल्टन ने रोजर मार्शल को हराया. राज्य ने आखिरी बार 1932 में किसी डेमोक्रेट को सीनेट भेजा था. 

दक्षिण कैरोलाइना में लिंडसे ग्राहम की मृत्यु के बाद उनकी बहन को सीनेट सीट पर नियुक्त किया गया था. ट्रंप ने उनका समर्थन किया, लेकिन डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एनी एंड्रयूज ने उन्हें करीब चार फीसद वोटों के अंतर से हरा दिया.

नॉर्थ कैरोलाइना में पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने माइक व्हाटली को करीब 20 अंकों यानी 20 प्रतिशत वोटों से हराकर रिटायर्ड रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस की सीट जीत ली.

मेन में लकड़ी के कारोबार से जुड़े ट्रॉय जैक्सन ने सुसान कॉलिन्स का 30 साल पुराना सीनेट करियर खत्म कर दिया. ट्रंप से दूरी बनाए रखने की उनकी कोशिश भी काम नहीं आई. आयोवा में जोश ट्यूरेक, ओहायो में शेरोड ब्राउन और जॉर्जिया में जॉन ओसॉफ ने भी जीत दर्ज की.

नए अमेरिका के नए चेहरे

इस चुनाव ने अमेरिकी राजनीति को कुछ नए ऐतिहासिक चेहरे दिए.

अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन में जीतकर अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम होने का गौरव हासिल किया. उनका मुकाबला बेहद कटु रहा. ट्रंप ने बिना किसी सबूत के उन्हें 'जिहादी' कहा, जिसके बाद उन पर इस्लामोफोबिया के आरोप लगे. जीत के जश्न में समर्थकों ने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट से पूरा माहौल जगमग कर दिया.

क्रिस पप्पस सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले समलैंगिक पुरुष बने

न्यू हैम्पशायर के क्रिसपप्पस सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले खुले तौर पर समलैंगिक पुरुष बने. उन्होंने अपने पति के साथ जीत का जश्न मनाया और उम्मीदवार जॉन सुनुनू की सार्वजनिक सेवा के लिए आभार जताया. कटु राजनीतिक माहौल में यह शालीनता का एक छोटा लेकिन उल्लेखनीय उदाहरण रहा.

अटलांटा की पूर्व मेयर कीशा लांस बॉटम्स जॉर्जिया की गवर्नर चुनी गईं. वह राज्य की पहली अश्वेत और पहली महिला गवर्नर होंगी. दो दशक से अधिक समय बाद यहां कोई डेमोक्रेट इस पद पर पहुंचेगा.

प्रतिनिधि सभा में इल्हान उमर ने ट्रंप की इस्तीफे की मांगों के बावजूद अपनी सीट बचा ली. डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने इसे 'अमेरिका की महान वापसी' बताया. वह माइक जॉनसन की जगह स्पीकर बनने जा रहे हैं. ऐसा होने पर वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे.

राष्ट्रपति का विरोधाभास

चुनावी हार के बाद ट्रंप के बयानों में विरोधाभास दिखाई दिए. उन्होंने द न्यूयॉर्क टाइम्स  से कहा कि वे नतीजे स्वीकार करने और डेमोक्रेट्स के साथ रास्ता निकालने को तैयार हैं. लेकिन फॉक्स न्यूज  से बातचीत में उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स 'पागलपन भरे' विधेयक लाएंगे, जिन्हें वे वीटो कर देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वे इन नतीजों को अपने खिलाफ जनादेश नहीं मानते.

ट्रंप ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को भी निशाना बनाया. उनका दावा था कि अगर वे खुद चुनाव लड़ रहे होते तो रिपब्लिकन भारी बहुमत से जीतते. हालांकि, उन्होंने माना कि ईरान युद्ध भी हार की एक वजह रहा और मतदाता पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का बोझ उठाने को तैयार नहीं थे. अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध फरवरी में शुरू हुआ था. इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी. दुनिया के ईंधन और उर्वरक व्यापार के लिए जरूरी इस समुद्री रास्ते में बाधा का असर अमेरिकी परिवारों ने पेट्रोल पंपों और किराने की दुकानों पर महसूस किया.

वाशिंगटन में क्या बदलेगा

विभाजित सरकार की स्थिति में राष्ट्रपति और कांग्रेस पर अलग-अलग पार्टियों का नियंत्रण होता है. सीनेट में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स राष्ट्रपति की नियुक्तियों को रोक या मंजूरी दे सकेंगे. इनमें कैबिनेट सदस्य, राजदूत और संघीय अदालतों के न्यायाधीश शामिल हैं. उन्हें संसदीय समितियों की अध्यक्षता और जांच के लिए समन जारी करने का अधिकार भी मिलेगा.

सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल को सीनेट की परमानेंट सबकमेटी ऑन इन्वेस्टिगेशंस का अध्यक्ष बनाए जाने की उम्मीद है. उन्होंने कहा, "हम अपने समन जारी करने के अधिकार का निश्चित रूप से इस्तेमाल करेंगे."

साभार एसोसिएटेड प्रेस

जांच के संभावित दायरे में ट्रंप परिवार के कारोबारी हित, व्हाइट हाउस के बॉलरूम के लिए जुटाया गया निजी चंदा और ईरान युद्ध शामिल हैं. यानी जांच डेमोक्रेटिक एजेंडे पर सबसे ज्यादा हावी रहेगी.

हालांकि, ट्रंप के पास वीटो की शक्ति बनी रहेगी. उनके वीटो को पलटने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए, जो डेमोक्रेट्स के पास नहीं है. अदालतें जांच को महीनों तक रोक सकती हैं और ट्रंप का न्याय विभाग तय करेगा कि जुटाए गए सबूतों पर मुकदमा चले या नहीं. 

डेमोक्रेट्स के सामने अपनी प्राथमिकताएं तय करने की चुनौती भी है. सीनेटर शेल्डन व्हाइटहाउस ने चेताया है कि जांच के चक्कर में परिवारों की तत्काल आर्थिक समस्याएं नजरअंदाज नहीं होनी चाहिए. कम कीमतों का वादा करने वाली पार्टी को अब यह साबित करना होगा कि वह राहत दे सकती है.

साभार एसोसिएटेड प्रेस

दुनिया के लिए क्या मायने 

सबसे बड़ा सवाल ईरान युद्ध है. डेमोक्रेट्स ने युद्ध खत्म करने का वादा किया है. सीनेट में बहुमत के बाद वे बजट और युद्ध संबंधी अधिकारों के जरिए व्हाइट हाउस पर दबाव बना सकते हैं. लेकिन नई कांग्रेस के कामकाज संभालने में करीब दो महीने हैं. हालांकि आशंका है कि चुनावी हार से अपमानित ट्रंप इस बीच और अधिक लापरवाह कदम उठा सकते हैं. 

आर्थिक मोर्चे पर डेमोक्रेट्स ट्रंप के टैरिफ वापस लेने की कोशिश कर सकते हैं लेकिन इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी या वीटो को पलटने लायक बहुमत चाहिए. अल जज़ीरा  के एक लेख में अमेरिकी नीति विश्लेषक एलेक्स जैक्वेज के शब्दों में, कीमतें 'पंखों की तरह धीरे-धीरे नीचे आती हैं.' यानी नीतियां बदलने के बाद भी राहत मिलने में वक्त लगेगा. 

अमेरिका के मित्र और प्रतिद्वंद्वी देशों के लिए संदेश साफ है. ट्रंप की सत्ता की सीमाएं हैं और अमेरिकी राजनीति अस्थिर बनी हुई है. आने वाले दो वर्षों में वाशिंगटन में सत्ता के दो केंद्र आमने-सामने होंगे. प्रतिबंधों, हथियारों की बिक्री और सैन्य कार्रवाइयों पर अधिक निगरानी और सवाल उठ सकते हैं.

आगे की राह

मध्यावधि चुनावों को अक्सर राष्ट्रपति के कामकाज पर जनमत संग्रह कहा जाता है. इस बार कंसास, टेक्सस, ओहायो और दक्षिण कैरोलाइना के मतदाताओं ने उन राज्यों में डेमोक्रेट्स को चुना, जहां दशकों से पार्टी को जीत नहीं मिली थी. कह सकते हैं कि मौजूदा व्यवस्था अब उन्हें स्वीकार्य नहीं है.

लेकिन इतिहास जीतने वालों को चेतावनी भी देता है. चुनावी लहरें स्थाई नहीं होतीं. जनता के गुस्से को स्थाई समर्थन समझने वाली पार्टी को अगली बार इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है. आने वाले महीने तय करेंगे कि डेमोक्रेट्स विरोध की लहर को भरोसे में बदल पाते हैं या नहीं.

वहीं ट्रंप के सामने ऐसी कांग्रेस होगी, जिसे वे अपनी मर्जी से नहीं चला सकेंगे. उन्हें तय करना होगा कि टकराव का रास्ता चुनना है या समझौते का.

3 नवंबर, 2026 की रात अमेरिकी मतदाताओं ने एक बार फिर दिखा दिया कि कोई राज्य हमेशा के लिए लाल या नीला नहीं होता. कभी-कभी जनता का गुस्सा एक ही रात में पूरे देश का राजनीतिक नक्शा बदल देता है.

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