उज्ज्वल निकम ने क्यों कहा कि राजकुमार राव बन सकते हैं वकील?
'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई' में एक सत्र फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ पर केंद्रित था. इसमें उज्ज्वल निकम और फिल्म में उनका किरदार निभाने वाले राजकुमार राव के बीच दिलचस्प बातचीत हुई

हाल ही में ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई’ में सरकारी वकील रहे उज्ज्वल निकम ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता राजकुमार राव की तारीफ की. उन्होंने बताया कि राव ने फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ में उनके हावभाव और व्यक्तित्व को कितनी बारीकी से उतारा है. यह फिल्म निकम की जीवनी के साथ-साथ अदालती घटनाक्रम पर आधारित ड्रामा भी है.
राव ने शूटिंग से पहले निकम से मुलाकात किए बिना और उन्हें अदालत में काम करते हुए देखे बिना यह सब किया. इस वजह से उनका काम और भी प्रभावशाली बन गया. निकम काफी व्यस्त रहते थे. इसलिए राव ने उन्हें समझने के लिए उनके वीडियो क्लिप और मीडिया से बातचीत के फुटेज का सहारा लिया.
राव ने निकम के बारे में कहा, "उन्हें बातें करना बहुत पसंद है. उन्हें पता है कि लोगों के बीच अपनी बात कैसे रखनी है. अदालत में उनकी ऊर्जा अलग होती है." इस किरदार को पर्दे पर उतारने के लिए राव ने अपनी आवाज और शारीरिक हावभाव पर खास ध्यान दिया. उन्होंने अपना वजन भी बढ़ाया.
निकम ने भी राव के अभिनय को मंजूरी दी. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं भरोसा दिला सकता हूं कि वे (राव) वकील बन सकते हैं." उन्होंने आगे कहा, "दरअसल टीजर देखने के बाद मेरे कई दोस्त हैरान रह गए. उन्होंने पूछा कि क्या वे मेरे साथ रहने लगे हैं? उन्हें राव में भी वैसा ही जोश दिखा, जैसा मुझ में है."
फिल्म में निकम की उस लंबी कानूनी लड़ाई को दिखाया गया है, जो उन्होंने 26/11 आतंकी हमलों के मामले में लड़ी थी. इन हमलों के दौरान जिंदा पकड़े गए एकमात्र आतंकवादी अजमल कसाब को दोषी ठहराने और उसे मौत की सजा दिलाने में निकम की अहम भूमिका थी.
निकम को हैरानी हुई कि दिनेश विजान की कंपनी मैडॉक फिल्म्स उन पर फिल्म बनाना चाहती है. खासकर इसलिए क्योंकि 26/11 हमलों पर पहले ही बड़े पर्दे और वेब सीरीज में कई कहानियां दिखाई जा चुकी थीं. लेकिन जब मैडॉक की टीम ने उन्हें बताया कि इस कहानी को बताना क्यों जरूरी है तो वे सहमत हो गए.
निकम की कुछ शर्तें थीं. उन्होंने कहा, "किसी भी किरदार का महिमामंडन नहीं होना चाहिए, यहां तक कि मेरा भी नहीं." उन्होंने यह भी कहा कि जहां तक संभव हो, मुकदमे में शामिल सभी लोगों के असली नामों का इस्तेमाल किया जाए. इससे जनता को मामले से जुड़े उन पहलुओं के बारे में जानकारी मिल सकती थी जो अब तक सामने नहीं आए हैं.
राव निकम को उस विशेष सरकारी वकील के तौर पर जानते थे जिन्होंने 1993 के मुंबई बम धमाकों और फिर 26/11 हमलों से जुड़े मामलों में पैरवी की थी. राव ने कहा, "लेकिन मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि एफटीआईआई में मुझसे एक साल जूनियर रहे अविनाश अरुण मेरे पास आएंगे और कहेंगे कि मैं उनका किरदार निभाऊं. मैं बहुत खुश था कि डिनो (दिनेश विजान) और उन्होंने मुझे इस भूमिका के लिए चुना."
राव अपने से ज्यादा उम्र के व्यक्ति का किरदार निभा रहे थे. साथ ही उनका और निकम का शारीरिक रूप-रंग भी काफी अलग है. इसके बावजूद अभिनेता ने अपनी आशंकाओं को पीछे छोड़ दिया. उन्होंने कहा, "जब कोई चीज मुझे डराती है तो उसे और ज्यादा करने का मन करता है. देश के लिए उज्ज्वल सर ने जो किया है, वह मुझे बहुत पसंद है. मैं फिल्म की पटकथा से मंत्रमुग्ध हो गया था."
राव का कहना है कि ‘प्रहार’ दर्शकों को 26/11 मामले के कई पहलुओं से रूबरू कराएगी. फिल्म में अदालत के बाहर निकम की जिंदगी की झलक भी मिलेगी. उन्होंने मुंबई के एक छोटे से होटल के कमरे में दो दशक से ज्यादा समय बिताया और न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ी.
यह पहली बार नहीं है जब राव ने काला कोट और सफेद शर्ट पहनकर किसी वकील का किरदार निभाया है. फिल्म ‘शाहिद’ में एक वास्तविक जीवन के वकील की भूमिका निभाने के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. हालांकि, उनका कहना है कि दोनों फिल्में एक-दूसरे से काफी अलग हैं.
राव के मुताबिक, ‘प्रहार’ "राष्ट्रीय हित के बारे में ज्यादा है". इसमें हमलों के पीछे की अंतरराष्ट्रीय साजिश को भी दिखाया गया है. फिल्म में उनकी पत्नी से जुड़ी कहानी भी है. उनकी पत्नी की भूमिका वामिका गब्बी ने निभाई है.
जब निकम इस मामले की पैरवी कर रहे थे, तब उनकी पत्नी बीमार थीं. इसके उलट, ‘शाहिद’ का ध्यान मुख्य रूप से उस वकील की निजी जिंदगी पर था. राव ने माना कि इन दोनों फिल्मों में काम करने से उन्हें कानूनी शब्दावली की भी समझ हुई है.
जब राव से पूछा गया कि शूटिंग के दौरान सबसे मुश्किल दृश्य कौन-सा था तो उन्होंने उस दृश्य का जिक्र किया जिसमें एक बाल कलाकार को अदालत में गवाही देनी थी. राव ने कहा, "अदालत में मौजूद हर व्यक्ति खामोश था क्योंकि वह बच्ची बहुत अच्छा अभिनय कर रही थी. वह दृश्य हमारे लिए बहुत भावुक था." उन्होंने आगे कहा, "अविनाश अरुण ने वहां बहुत खूबसूरत माहौल बनाया था."
निकम ने कसाब से अपनी मुलाकातों और उसके बारे में बनी अपनी धारणा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, "वह बहुत मक्कार था. उसे पूरी ट्रेनिंग दी गई थी कि मीडिया और पुलिस से कैसे निपटना है और क्या कहना है."
निकम ने बताया कि अदालत में कसाब उन्हें ‘बादशाह’ कहकर बुलाता था. उन्होंने कहा, "वह लगातार अलग-अलग कहानियां गढ़ता रहता था. वह बहुत चालाक था." जब निकम से पूछा गया कि ‘प्रहार’ से दर्शकों को सबसे बड़ी सीख क्या मिलेगी तो उन्होंने जवाब दिया, "हमारा संविधान सबसे ऊपर है."