'लास्ट मैन इन टावर' में मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता की जोड़ी क्यों है खास?

'लास्ट मैन इन टावर' में मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता पहली बार भरपूर स्क्रीन स्पेस में साथ नजर आए हैं. इस आलेख में दोनों ने एक-दूसरे के अभिनय और अपने किरदारों को लेकर खुलकर बात की

फिल्म के अपने-अपने किरदारों में मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता

गूगल पर मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता की फिल्मों के बारे में सर्च करेंगे तो कई फिल्में सामने आएंगी, जिनमें वीर-जारा और स्पेशल 26 भी शामिल हैं. लेकिन दोनों कलाकार बताते हैं कि इनमें से किसी भी फिल्म में उनके बीच संवाद वाला कोई ढंग का सीन नहीं था. 

दिव्या दत्ता कहती हैं, "बस एक-दो शॉट में साथ दिखे थे." हालांकि वे और बाजपेयी एक-दूसरे को सालों से जानते हैं. दोनों की मुलाकात पार्टियों और अवॉर्ड शो में होती रही है.

दिव्या दत्ता कहती हैं, "जब कोई पूछता है कि आप किस अभिनेता के साथ काम करना चाहेंगी तो मेरी विश लिस्ट में सबसे पहले उनका नाम आता है. इसे आप मेरा लालच कह लीजिए. आखिरकार मुझे अपने सामने उस जादू को देखने का मौका मिला."

दिव्या दत्ता और मनोज बाजपेयी लास्ट मैन इन टावर  में साथ नजर आ रहे हैं जो 11 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई. अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर बनी इस फिल्म की कहानी एक हाउसिंग सोसाइटी के उन लोगों के इर्द-गिर्द घूमती है जिनके बीच सोसाइटी के पुनर्विकास को लेकर टकराव है. दोनों कलाकार जानते थे कि यह ऐसी स्थिति है, जिससे मुंबई में रहने वाले ज्यादातर लोग खुद को जोड़ पाएंगे.

मनोज बाजपेयी कहते हैं, "जब आपको अपना सामान बांधकर कहीं और जाना पड़ता है, तो बुरा लगता है. आप घर की हर दीवार, हर कोने से जुड़े होते हैं. फिल्म में मेरे किरदार मास्टरजी का घर न छोड़ने का भाव भी दर्शकों को समझ आता है. उनके लिए यह घर उनकी पत्नी और उनके साथ बिताए समय और बच्चों की यादों से जुड़ा है. वह सिद्धांतों वाला आदमी है लेकिन यही सिद्धांत लोगों के सपनों और बदलाव के रास्ते में आ रहे हैं जबकि बदलाव बहुत जरूरी है."

फिल्म के किरदारों की ग्रे शेड वाली छवि भी दिव्या दत्ता को इस प्रोजेक्ट की ओर खींच लाई. वे एक ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जिसे अपने दिव्यांग बच्चे की देखभाल करनी है. 

फिल्म में मनोज बाजपेयी का मुख्य किरदार है

दिव्या कहती हैं, "जब आप एक ही तरह की जिंदगी में फंस जाते हैं तो खुद को भूल जाते हैं. आप भूल जाते हैं कि आपकी भी इच्छाएं और जरूरतें हैं जो आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती हैं. संगीता ऐसी ही महिला है जो खुद को आईने में देखना भूल चुकी है."

मास्टरजी और संगीता के बीच का टकराव फिल्म की मुख्य कहानियों में से एक है. दिव्या बताती हैं, "उन दोनों के बीच एक रिश्ता है. उसे लगता है कि मास्टरजी उसे समझते हैं लेकिन फिर कहीं जाकर उनके रिश्ते का समीकरण बदल जाता है. अपने-अपने तरीके से दोनों सही हैं."

दिव्या को लगता है कि यह फिल्म इस बात पर बातचीत शुरू करेगी कि "जो हम चाहते हैं, उसे पाने के लिए हम किन चीजों से समझौता करने को तैयार हैं."

यह कहानी खास तौर पर मुंबई के लोगों से जुड़ सकती है. जगह की कमी के चलते मुंबई में ऊंची इमारतें तेजी से बढ़ रही हैं और पुरानी हाउसिंग सोसाइटियों की जगह गेटेड कम्युनिटीज ले रही हैं. ऐसे में लोगों के बीच पहले जैसा मेलजोल भी कम होता जा रहा है.

दिव्या कहती हैं, "अब आप अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हैं कि आपको पता ही नहीं होता कि किसी और की जिंदगी में क्या चल रहा है. धीरे-धीरे जो खामोशी और अकेलापन हमारी जिंदगी में आया है, उसमें अब आपके पास कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं है."

बाजपेयी कहते हैं, "जब मैं इस शहर में आया था, तब यहां की गर्मजोशी मैंने महसूस की थी. लेकिन जैसे-जैसे टावर बढ़ते गए, दूरियां भी बढ़ती गईं. अब लोगों की दिलचस्पी एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) और सुविधाओं में ज्यादा है."

मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता एक-दूसरे के काम की काफी तारीफ करते हैं. एक-दूसरे के सफर के लिए सम्मान भी रखते हैं. इसलिए पहली बार दोनों को साथ में भरपूर स्क्रीन टाइम मिलना उनके लिए और भी खास अनुभव रहा.

दिव्या दत्ता बाजपेयी के बारे में कहती हैं, "वे बहुत उदार अभिनेता हैं. वे कहेंगे, 'यह तुम्हारा मैदान है, जाओ और खेलो.' किसी ऐसे कलाकार के साथ काम करना बहुत शानदार है जो आपके प्रदर्शन को बेहतर बना दे."

बाजपेयी भी उनकी तारीफ करते हुए कहते हैं कि दिव्या दत्ता की अभिनय प्रतिभा को अब आखिरकार वह पहचान मिल रही है, जिसकी वे हकदार हैं. वे कहते हैं, "दिव्या शानदार और जुनूनी अभिनेत्री हैं. मुझे लगता है कि वे उस बड़ी भूमिका के बिल्कुल करीब हैं जिसका उन्हें इंतजार है. मैं भी उस दिन का इंतजार कर रहा हूं."

सिनेमा प्रेमियों के लिए अच्छी बात यह है कि दोनों कलाकार जल्द ही फिर एक साथ स्क्रीन पर नजर आएंगे.

यह जोड़ी अगली बार अपने पसंदीदा सहयोगियों में से एक, नीरज पांडे की फिल्म में साथ दिखाई देगी. बाजपेयी कहते हैं, "उनके साथ काम करना परिवार के साथ रहने जैसा है."

दिव्या आगे कहती हैं, "वे उन लोगों की जिंदगी में एक भरोसा देने वाली मौजूदगी हैं जिन्हें उन्होंने छुआ है. मैं उनसे कभी नहीं पूछती कि उनकी फिल्म में मेरा किरदार क्या है."

बाजपेयी बस इतना बताते हैं कि यह एक ‘पागलपन भरी फिल्म’ है और इसमें वे दिल्लीवाले का किरदार निभा रहे हैं. फिलहाल, दोनों कलाकार दर्शकों के फैसले का इंतजार कर रहे हैं कि बदलते शहर में मुंबईकरों की जिंदगी को उन्होंने पर्दे पर किस तरह पेश किया है.

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