'हनुमान अंश' कैसे बनी साल की सबसे चौंकाने वाली हिट?
सिनेमा के नजरिए से ‘हनुमान अंश’ को लेकर किसी की राय चाहे जो हो, इसने एक आम आदमी के मूल्यों और विश्वासों को सामने रखकर दर्शकों के दिल में जगह बनाई है

दो करोड़ रुपए में बनी 'हनुमान अंश' अब तक 125 करोड़ रुपए कमा चुकी है
रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनते जा रहे हैं. आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा पर बनी बायोपिक को लेकर दर्शकों का उत्साह थमने का नाम नहीं ले रहा. 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया है और पूरे देश को चौंका दिया है.
7 अगस्त को बिना किसी खास प्रचार-प्रसार के रिलीज हुई इस फिल्म ने चौथे हफ्ते से जैसे अपनी अलग रफ्तार पकड़ ली. यश की 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' दर्शकों को खास पसंद नहीं आई और इसकी जगह आस्था लोगों को सिनेमाघरों तक खींच लाई.
खासकर उत्तर और पश्चिम भारत में दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी. और अब भी लोग बड़ी संख्या में सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं.
करीब 2 करोड़ रुपए के अनुमानित बजट में बनी और नए कलाकार शोभिनव सत्य को लेकर बनाई गई 'हनुमान अंश' अब करीब 150 करोड़ रुपए कमा चुकी है. इसमें करीब 55 करोड़ रुपए सिर्फ पांचवें हफ्ते में अब तक आए हैं. संभवतः कोई भी फिल्म पांचवें हफ्ते में इस स्तर की कमाई तक नहीं पहुंची है.
यह उपलब्धि इसलिए भी ज्यादा प्रभावशाली है क्योंकि यह फिल्म इंडस्ट्री से बाहर के लोगों के एक समूह ने बनाई है. इनमें ज्यादातर आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा के भक्त हैं. आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है जो दर्शकों को लगातार सिनेमाघरों तक खींच रहा है?
विशाल चतुर्वेदी की लिखी और निर्देशित यह फिल्म लक्ष्मी नारायण शर्मा यानी नीम करोली बाबा की जिंदगी को सीधे-सादे तरीके से सामने रखती है. फिल्म दर्शकों को उनके बचपन के दिनों से लेकर जीवन की आगे की यात्रा तक ले जाती है.
करीब 12 साल की उम्र में उन्होंने ध्यान करना शुरू कर दिया था और संन्यासी का जीवन अपना लिया था. इसके बाद उन्होंने कई यात्राएं कीं और उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई. उन्हें अपनी भविष्यवाणी करने की क्षमताओं के लिए भी जाना जाने लगा.
'हनुमान अंश' में नीम करोली बाबा के जीवन की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं को दिखाया गया है. इनमें मुख्य रूप से उनके चमत्कारों से जुड़ी किंवदंतियों और इस दौरान जिन लोगों के जीवन पर उनका असर पड़ा, उन पर ध्यान दिया गया है.
फिल्म अति महिमामंडन का रास्ता नहीं पकड़ती. फिल्म का मकसद अपने फिल्मी अंदाज से दर्शकों को चमत्कृत करना नहीं, बल्कि नीम करोली बाबा की शख्सियत को ही इस तरह सामने रखना है कि वह दर्शकों पर असर छोड़े.
फिल्म की खासियत भी इसके मुख्य किरदार की तरह सादगी में है. फिल्म का मुख्य उद्देश्य दर्शकों को गुरु की शिक्षाओं और उनकी शक्तियों से परिचित कराना है. शोभिनव सत्य ऐसे अभिनेता के रूप में सामने आते हैं जो किसी भी अपमान, मुश्किल या परिस्थिति का सामना मुस्कुराते हुए करते हैं.
बिना किसी तामझाम और लगभग उपदेशात्मक अंदाज में बनाई गई यह फिल्म नीम करोली बाबा के अनुयायियों को उनके बारे में लंबे समय से सुने गए किस्सों को बड़े पर्दे पर देखने का मौका देती है.
वहीं जिन लोगों को उनके बारे में बहुत कम जानकारी है और जो महज जिज्ञासा के चलते फिल्म देखने पहुंचते हैं, वे न सिर्फ नीम करोली बाबा के जीवन से परिचित होते हैं बल्कि यह भी सोचने लगते हैं कि अभी उनकी जिंदगी के कितने और प्रसंग या मुलाकातें पर्दे पर दिखाई जानी बाकी हैं.
फिल्म की गुणवत्ता को लेकर किसी की राय चाहे जो हो, 'हनुमान अंश' ने एक आम आदमी के उन मूल्यों और विश्वासों को सामने रखकर दर्शकों के दिल में जगह बनाई है, जिनकी वजह से उसकी सादगी भरी जीवनशैली और प्रशंसनीय मूल्यों ने धीरे-धीरे उसे असाधारण बना दिया.
'वाइल्ड वाइल्ड कंट्री' जैसी फिल्मों, जो अमेरिका में धर्मगुरु रजनीश पर बनी डॉक्यूमेंट्री है, वेब सीरीज 'आश्रम' और यहां तक कि 'एमएसजी: द मैसेंजर ऑफ गॉड' जैसी फिल्मों की दुनिया में 'हनुमान अंश' एक अलग तरह की फिल्म लगती है.
यह जैसे उस दौर के लिए एक जवाब है, या कहें एक अपवाद है. फिल्म एक व्यक्ति को किसी बड़े पर्दे के सुपरहीरो की तरह पेश किए बिना उसकी सहज अच्छाई पर ध्यान देती है.
फिल्म की अभूतपूर्व सफलता के बाद अब सवाल यह है कि क्या इससे ऐसा चलन शुरू होगा जिसमें दूसरे लोग भी अपने आध्यात्मिक गुरुओं की जिंदगी को पर्दे पर उतारने के लिए प्रेरित होंगे?
इसका जवाब अगले साल तक ही मिल पाएगा. फिलहाल दर्शक नीम करोली बाबा की शिक्षाओं से अभिभूत हैं. आखिर आस्था से बेहतर बिकता भी क्या है?