डेटिंग ऐप फ्रॉड ने बदला भारतीयों के प्यार तलाशने का तरीका

डेटिंग ऐप पर फेक प्रोफाइल, कैटफिशिंग और फ्रॉड ने बढ़ाई सतर्कता. अब भारतीय मैच से मिलने से पहले वीडियो कॉल, सोशल मीडिया चेक और दूसरी तरह की जांच-पड़ताल कर रहे हैं

सरकार भी ऑनलाइन डेटिंग या मैट्रिमोनियल फ्रॉड पर लोगों को चेतावनी दे चुकी है

डेटिंग ऐप पर किसी अनजान व्यक्ति से पहली बार मिलना हमेशा कुछ अनिश्चितता के साथ आता है. लेकिन अब सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि सामने वाले के साथ केमिस्ट्री बनेगी या नहीं. सवाल अब यह भी है कि इनवाइट असली है या नहीं और जिस जगह बुलाया गया है, वह भी भरोसेमंद है या नहीं.

भारत में डेटिंग और रोमांस से जुड़े फ्रॉड अब फेक प्रोफाइल और कैटफिशिंग (किसी और की पहचान या तस्वीर का इस्तेमाल करना) से लेकर बढ़े हुए कैफे बिल, रुपए-पैसे की धोखाधड़ी, ब्लैकमेल और लूटपाट तक पहुंच गए हैं. आंकड़े बताते हैं कि लोग अब ज्यादा सतर्क क्यों हो रहे हैं.

मैकफी के 2026 के एक सर्वे के मुताबिक, सर्वे में शामिल 75 फीसदी भारतीयों ने डेटिंग ऐप, वेबसाइट या सोशल मीडिया पर ऐसे फेक प्रोफाइल या तस्वीरें देखीं जो AI से बनाई गई लगती थीं. 

वहीं 46 फीसदी लोगों को पता चला कि वे किसी बॉट या फेक प्रोफाइल से बात कर रहे थे. हर सात में से एक व्यक्ति ने बताया कि उसने ऑनलाइन डेटिंग या रोमांस फ्रॉड में पैसे गंवाए हैं. ऐसे मामलों में औसतन करीब 2.8 लाख रुपए का नुकसान हुआ.

यह समस्या खास तौर पर युवाओं में ज्यादा दिखाई देती है. सर्वे के मुताबिक 25 से 34 साल की उम्र के 48 फीसदी भारतीयों ने कहा कि उन्हें हफ्ते में कम से कम एक बार संभावित रोमांस फ्रॉड का सामना करना पड़ा. इस आयु वर्ग में हर तीन में से एक व्यक्ति ने बताया कि उसने ऐसे फ्रॉड में पैसे गंवाए.

वहीं सरकार के इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने चेतावनी दी है कि जालसाज डेटिंग और मैट्रिमोनियल दोनों तरह के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल फर्जी पहचान बनाने, लोगों का भावनात्मक भरोसा जीतने और बाद में उन्हें फर्जी निवेश या दूसरे वित्तीय लेन-देन के लिए तैयार करने में कर रहे हैं.

डेट पर जाने से पहले लोग अब मैच की अच्छे से जांच-पड़ताल करना चाहते हैं (सांकेतिक फोटो)

गुरुग्राम के 32 वर्षीय श्याम मल्होत्रा के लिए इन घटनाओं ने पहली डेट पर जाने का तरीका ही बदल दिया है. एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में काम करने वाले मल्होत्रा कहते हैं, "पहले अगर कोई कहता था, 'मैं एक अच्छा बार जानता हूं, वहीं मिलते हैं', तो मैं सीधे चला जाता था. अब अगर कोई व्यक्ति किसी एक खास कैफे या बार में मिलने पर बहुत ज्यादा जोर देता है तो यह अपने आप में एक रेड फ्लैग (खतरे का संकेत) लगता है."

अब मल्होत्रा खुद फेमस और थोड़ी भीड़-भाड़ वाली जगहों का सुझाव देते हैं, यह देखते हैं कि मैच की सोशल मीडिया हिस्ट्री भरोसेमंद है या नहीं और मिलने से पहले छोटी-सी वीडियो कॉल करना पसंद करते हैं. 

मल्होत्रा के मुताबिक, "कॉफी पर मिलने से पहले बैकग्राउंड चेक करना थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन डेटिंग ऐप अब ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां आपको पहले यह पक्का करना पड़ता है कि सामने वाला व्यक्ति असली है. उसके बाद ही आप यह सोच पाते हैं कि आपको वह पसंद है या नहीं."

यह सतर्कता ऑनलाइन रोमांस से जुड़े फ्रॉड के अलग-अलग तरीकों की वजह से भी बढ़ी है. अधिकारियों ने ऐसे फेक प्रोफाइल को लेकर चेतावनी दी है, जो पहले लोगों के साथ रिश्ते बनाते हैं और फिर पैसे मांगते हैं. कई मामलों में यूजर्स को फर्जी क्रिप्टोकरेंसी या ट्रेडिंग स्कीम की तरफ भेजा जाता है या उनसे निजी वित्तीय जानकारी मांगी जाती है.

कुछ फ्रॉड ऑनलाइन रिश्ते से निकलकर ऑफलाइन मुलाकात तक पहुंच जाते हैं. कोई मैच किसी खास रेस्टोरेंट में मिलने पर जोर दे सकता है, जहां बाद में पीड़ित को बढ़ा हुआ बिल थमा दिया जाता है. 

वहीं, कुछ मामलों में मुलाकात के बाद धमकी या ब्लैकमेल किया जाता है. ऑनलाइन फ्रॉड का माहौल भी तेजी से खराब हुआ है. मैकफी के 2026 के सर्वे के मुताबिक, 87 फीसदी भारतीयों का सामना किसी न किसी तरह के ऑनलाइन फ्रॉड से हुआ और 51 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने पैसे गंवाए.

पुणे की डेटिंग काउंसलर नैना कपूर इस बदलाव को ‘डिफेंसिव डेटिंग’ कहती हैं. उनके मुताबिक, "लोग अभी भी अनजान लोगों से मिलने में दिलचस्पी रखते हैं लेकिन डेट पर जाने से पहले वे कई स्तरों पर सामने वाले की जांच कर रहे हैं. वे पहले वीडियो कॉल करते हैं, लिंक्डइन और इंस्टाग्राम चेक करते हैं, अनजान जगहों पर मिलने से इनकार करते हैं और दोस्तों के साथ अपनी लाइव लोकेशन शेयर करते हैं."

कपूर कहती हैं, "पहले ये सावधानियां मुख्य रूप से शारीरिक सुरक्षा को लेकर होती थीं खासकर महिलाओं के मामले में. अब पुरुष भी इसी तरह की कई जांच कर रहे हैं क्योंकि उन्हें रुपए-पैसे का फ्रॉड और संगठित ठगी के गिरोहों की चिंता रहती है."

हालांकि, कपूर के मुताबिक इसका एक दूसरा पहलू भी है. फ्रॉड का डर डेटिंग की शुरुआत को ही बदल रहा है. वे कहती हैं, "पहली डेट के लिए थोड़ा खुलापन जरूरी होता है. लेकिन अगर आप हर बातचीत में सामने वाले की बातों में विरोधाभास तलाशते रहें, यह जांचते रहें कि तस्वीरें असली हैं या नहीं और सोचते रहें कि उसने कोई खास रेस्टोरेंट ही क्यों चुना तो आकर्षण से पहले शक पैदा हो जाता है."

इसलिए डेटिंग ऐप्स के सामने अब चुनौती सिर्फ लोगों को उनके लिए सही पार्टनर ढूंढने में मदद करने तक सीमित नहीं रह सकती. बहुत से यूजर्स के लिए पहली और सबसे जरूरी चुनौती अब इससे भी बुनियादी है: स्क्रीन के दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति वास्तव में असली है या नहीं, यह साबित करना.

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