जीवन-मरण के चक्र की हिंदू मान्यताओं को यहां से बेहतर किसी और जगह शायद नहीं समझा जा सकता. जीवन की नश्वरता और उसके आगे की आध्यामिक यात्रा से परिचित करते इस घाट पर चिताओं की आग कभी बुझती नहीं है.
वाराणसी के मध्य क्षेत्र में स्थित इस घाट तक पहुंचने के लिए शहर की घुमावदार संकरी गलियों से गुजरकर आसानी से पहुंचा जा सकता है.


मणिकर्णिका घाट पर भगवान शिव प्रतिष्ठापित हैं, जिन्हें जीवन-मरण के चक्र के दिव्य संरक्षक के तौर पर देखा जाता है. यह घाट ब्रह्मांड के सृजन और विघटन में शिव की भूमिका को दर्शाता है, जो अस्तित्व की शाश्वत लय का प्रतीक है.