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छत्तीसगढ़ में चुनावी मूड में आए मुखिया

रमन सिंह के रोड शो और लोक-लुभावन घोषणाओं से बना चुनाव का माहौल, लेकिन पार्टी नेताओं ने ही उनके खिलाफ में मोर्चा खोल रखा है.

अपडेटेड 29 जनवरी , 2012

छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में हैट्रिक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. राज्‍य में अगले साल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एक ओर जहां कांग्रेस ने आरटीआइ के जरिए सरकार की खामियों को उजागर करने का बीड़ा उठाया है, वहीं मुख्यमंत्री ने चुनाव जिताने वाले लोकलुभावन नारों की झड़ी लगा दी है. वे अपने प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते.

हाल में जब डॉ. रमन सिंह की सरकार को भीतर और बाहर से घेरने की कोशिश हुई तो उन्होंने सीधे जनता तक पहुंच बनाते हुए अपनी लोकलुभावन योजनाओं का पिटारा खोल दिया. आठ साल से राज्‍य के मुख्मयमंत्री ने हैट्रिक बनाने की दिशा में पहला कदम पिछले साल 15 अगस्त को उठाते हुए नौ नए जिलों का ऐलान किया. इसके बाद योजनाओं और वादों की झड़ी-सी लगा दी. सरकारी नौकरियों में आदिवासियों का आरक्षण बढ़ाकर 16 से 32 फीसदी कर दिया, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए इसी महीने सेवा गारंटी कानून भी लागू कर दिया. राजनैतिक समीक्षकों का मानना है कि नए जिले और आदिवासी आरक्षण का पासा फेंककर रमन सिंह ने राजनैतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश है.

11 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

दरअसल, 2003 के चुनाव में कांग्रेस की लुटिया आदिवासियों की नाराजगी की वजह से डूबी थी. आदिवासी क्षेत्रों की 34 में से 26 सीटें भाजपा की झोली में गई थीं और रमन सिंह पहली बार राज्‍य के मुख्यमंत्री बने थे. इसके बाद 2008 में भी बस्तर की 12 में से 11 सीटें भाजपा को मिली थीं. मुख्यमंत्री के योजनाओं के पिटारे में सबसे ज्यादा योजनाएं आदिवासियों के लिए हैं. इसी क्रम में आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति राशि भी बढ़ा दी गई है.

04 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

लेकिन रमन सिंह ने अन्य समुदायों को भी निराश नहीं किया है. कैबिनेट ने प्रदेश के छात्रों को चार फीसदी ब्याज पर एजुकेशन लोन को मंजूरी दे दी है और किसानों के लिए सरकार अलग से कृषि बजट लाने जा रही है. इसी साल शुरू हुई संजीवनी एंबुलेंस योजना इतनी लोकप्रिय है कि इसके बारे में मोबाइल पर मजेदार एसएमएस चल रहे हैं. मसलन, यमराज अपने दूत से पूछता हैः 'मरने वालों की संख्या कम कैसे हो गई है?’ दूत कहता हैः ‘क्या करें, मेरे पहुंचने के पहले संजीवनी एक्सप्रेस पहुंच जाती है.' दरअसल, इस योजना में 108 नंबर डायल करने के 15-20 मिनट के भीतर एंबुलेंस हाजिर हो जाती है.

28 दिसम्‍बर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

आम आदमी से सीधे संपर्क के लिए मुख्यमंत्री हर साल ग्राम सुराज अभियान चलाते हैं. पिछले साल इसमें मुख्यमंत्री को साढ़े चार लाख शिकायतें मिली थीं, जिनके त्वरित निबटान के लिए उन्होंने अपने सचिवालय के भरोसेमंद आइएएस अधिकारी सुबोध सिंह को प्रमुख बनाया है. सुबोध सिंह बताते हैं, '4,47,000 शिकायतों का निराकरण हो चुका है.' अब रमन सिंह दर्जन भर और नई लोक कल्याणकारी योजनाएं लांच करने की तैयारी कर रहे हैं.

21 दिसम्‍बर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

योजनाओं से बने माहौल को बनाए रखते हुए नए जिलों का उत्सव के अंदाज में एकके बाद एक उद्घाटन किया जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री के चुनावी स्टाइल में रोड शो हो रहे हैं. रोड शो में उमड़ रही भीड़ ने विपक्ष की बेचैनी बढ़ा दी है. राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सभाओं में 25,000 की भीड़ जुटाना मुश्किल होता है लेकिन रमन सिंह के रोड शो में इससे कहीं ज्यादा भीड़ इकट्ठा हो रही है.

लेकिन रमन सिंह के सामने मुश्किलें भी कम नहीं हैं. सरकारी योजनाओं को अंजाम तक पहुंचाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों का सरकार के पास अभाव है. हालत यह है कि एक सचिव के पास दो से तीन विभागों की जिम्मेदारी है. विकल्प न होने के कारण सचिवालय में पिछले तीन साल से कोई तबादला नहीं हुआ है. पार्टी स्तर पर भाजपा के ही नेता रमन सिंह की मुश्किलों को और बढ़ा रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद दिलीप सिंह जूदेव ने अपनी ही सरकार पर प्रशासनिक आतंकवाद का आरोप लगाया है तो पार्टी के वरिष्ठ नेता रमेश बैस ने अफसशाही का आरोप लगाते हुए राज्य तीरंदाजी संघ से इस्तीफा दे दिया.

14 दिसंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

राज्य बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और विधायक देवजी पटेल ने भी सीमेंट के मूल्य वृद्घि को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. आम तौर पर निर्विवाद रहने वाले रमन सिंह उस वक्त विवादों में आ गए जब उनके एक रिश्तेदार का नाम माइनिंग घोटाले में आया. इससे तमतमाए मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह डाला, 'मैं छोड़ूंगा नहीं.' उन्होंने दो मीडिया समूहों के आधा दर्जन से ज्यादा लोगों पर एक-एक करोड़ रु. का मानहानि का दावा भी ठोंक डाला.

सरकार में द्वंद्व से कांग्रेस उत्साहित है पर पार्टी में गुटबाजी भाजपा के लिए अच्छा संकेत है. पिछले दिनों केंद्रीय ग्रामीण और पंचायत मंत्री जयराम रमेश के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल को भावी मुख्यमंत्री कहने से बाकी नेता इतने नाराज हुए कि पिछले हफ्ते जयराम रमेश रायपुर आए तो एक भी कांग्रेसी उन्हें रिसीव करने हवाई अड्डा नहीं पहुंचा. पटेल के लाख प्रयास के बाद भी कांग्रेस के एकजुट न होने की बड़ी वजह मुख्यमंत्री के दावेदार आधा दर्जन नेता हैं. केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत और नंदकुमार पटेल दौड़ में तो हैं ही, विपक्ष के नेता रवींद्र चौबे, अजीत जोगी, विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा जैसे छत्रप भी पीछे नहीं हैं.

07 दिसंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

दूसरी ओर, रमन सिंह शक्ति प्रदर्शन का एक भी मौका हाथ से जाने नहीं दे रहे. पिछले साल उनके बेटे की शादी में देश भर से आए नेताओं और उद्योगपतियों का ऐसा जमावड़ा लगा कि रायपुर हवाई अड्डा छोटा पड़ गया.

रमन सिंह पहले भी अपनी लोकलुभावन योजनाओं के चलते ही सत्ता में आए थे. पहली पारी में उनकी 32 लाख बीपीएल परिवारों को एक रु. किलो चावल योजना ने कांग्रेस को चुनाव से पहले ही बैकफुट पर जाने को मजबूर कर दिया था. छत्तीसगढ़ के पीडीएस की वाहवाही देश भर में हो रही है. कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे विकसित राज्‍यों के नुमाइंदे इसे देखने आ रहे हैं. लेकिन राजनीति के मैदान में हैट्रिक लगाना कोई आसान काम नहीं.

जीत की हैट्रिक बनाएंगे: डॉ.रमन सिंह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मिशन 2013 के मद्देनजर लोकलुभावन घोषणाएं कर प्रदेश में चुनावी सरगर्मी तेज कर दी है. मीडिया पर नियंत्रण लगाने की उनकी कवायद और पार्टी के भीतर हो रहे विरोध जैसे मुद्दों पर इंडिया टुडे से उनकी बातचीत के अंशः- माइनिंग घोटाले की खबर दिखाने पर राज्य में एक चैनल पर प्रतिबंध लगा दिया गया? चैनल दिखाने का काम केबल वालों का है, सरकार का नहीं. प्रतिबंध लगाने का सवाल ही नहीं है, हम मीडिया का सम्मान करते हैं.- लेकिन आपने कहा था छोड़ूंगा नहीं? मैंने कहा था कि न्यायालय जाऊंगा, छोड़ूंगा नहीं. प्रस्तुतिकरण में फर्क आ गया, जिसके लिए चैनल ने खेद भी व्यक्त किया. वैसे भी आधारहीन लांछन के खिलाफ न्यायालय जाना गलत तो नहीं है.- पार्टी के भीतर असंतोष है? असंतोष की बात अफवाह है. - विपक्ष कहता है कि प्रदेश में बेल्लारी से बड़ा माइनिंग घोटाला हुआ है? 20,000 करोड़ रु. के भ्रष्टाचार का भी आरोप है? प्रदेश में 85 फीसदी माइनिंग कोल इंडिया और एनएमडीसी जैसे कंद्रीय उपक्रम करते हैं, इससे हमारा क्या लेना-देना. अविश्वास प्रस्ताव में साफ हो गया कि भ्रष्टाचार का आरोप निराधार था. जनता सब समझती है. हम फिर से सत्ता में आएंगे.भाजपा को बाहर करेंगे: नंदकुमार पटेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के नेतृत्व में पार्टी ने भाजपा सरकार पर सुनियोजित ढंग से हमला तो बोला लेकिन उनकी पार्टी की गुटबाजी खत्म होने का नाम नहीं ले रही. अंदरूनी घमासान से जूझ रही कांग्रेस क्या दे पाएगी भाजपा को पटखनी? उनसे बातचीत के अंशः- नए जिलों का गठन, आदिवासी आरक्षण जैसी सरकार की लोकलुभावन योजनाओं से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ेंगी? जनता जानती है कि ये घोषणाएं असफलताओं को छिपाने के लिए हैं. सरकार अपनी ही घोषणाओं में उलझ गई है. जिलों के नामकरण के विवाद से राज्य में अशांति पैदा हो गई है. सरकार ने आरक्षण का जो खेल खेला है वही भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाएगा.- कांग्रेस की चुनावी रणनीति क्या होगी? हमने जनता के बीच जाकर सरकार की असलियत बतानी शुरू कर दी है. राज्य भर में जेल भरो आंदोलन, धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है. हम अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे. सरकार को छोड़ेंगे नहीं.- लगातार दो चुनाव हारने के बाद भी पार्टी की गुटबाजी कम नहीं हो पा रही? गुटबाजी की बात भाजपा और संघ की फैलाई हुई अफवाह है. पार्टी का एक ही लक्ष्य है, अगले चुनाव में भाजपा को बाहर करना.- भाजपा कहती है कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है? इसका जवाब तो जनता देगी, वह भी अगले ही चुनावों में.
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