गोवा में लंबे समय से विपक्ष में बैठी कांग्रेस अब सत्ता में वापसी की कोशिश में है. इसी रणनीति के तहत पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष अमित पाटकर की जगह गिरीश चोडणकर को प्रदेश की कमान सौंपी है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं. हालांकि ऐसी अटकलें भी हैं कि चुनाव 2026 के अंत में कराए जा सकते हैं.
2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद गिरीश चोडणकर ने गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था. इसके बाद अमित पाटकर को जिम्मेदारी दी गई थी. हालांकि अब उन्हें हटाए जाने से पार्टी में नाराजगी पैदा हुई है.
दक्षिण गोवा से कांग्रेस सांसद कैप्टन (सेवानिवृत्त) विरियातो फर्नांडीस ने नेतृत्व परिवर्तन के तरीके पर खुलकर असहमति जताई है. पार्टी की महासचिव मनीषा उसगांवकर और सोशल मीडिया समन्वयक शमीला सिद्दीकी जैसे पदाधिकारियों ने विरोध में इस्तीफा दे दिया है.
पाटकर ने इंडिया टुडे से कहा कि वे कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात के बाद ही मीडिया से बात करेंगे.
चोडणकर कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं. उन्होंने 1990 के दशक में मडगांव के पास फतोर्डा में बूथ अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया था. वे कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI और यूथ कांग्रेस से जुड़े रहे हैं. हाल ही में तमिलनाडु में पार्टी प्रभारी के रूप में उन्हें अभिनेता से नेता बने विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के साथ चुनाव बाद गठबंधन कराने और राज्य सरकार में शामिल होने में अहम भूमिका निभाने वाला माना जाता है.
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के गोवा प्रभारी और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री माणिकराव ठाकरे ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन पर पिछले दिसंबर में हुए जिला पंचायत चुनावों से पहले चर्चा हो चुकी थी और पाटकर को इसकी जानकारी थी.
ठाकरे ने कहा कि चोडणकर के पक्ष में जाने वाला एक बड़ा कारण उनका ओबीसी भंडारी समुदाय से होना था. भंडारी गोवा का सबसे बड़ा जातीय समूह है. ठाकरे ने कहा, "हम ओबीसी को नजरअंदाज करने का जोखिम नहीं उठा सकते."
विपक्ष के नेता यूरी अलेमाओ और कैप्टन फर्नांडीस जहां ईसाई समुदाय से हैं, वहीं कांग्रेस ने विधायकों कार्लोस फरेरा, अल्टोन डी'कोस्टा और वरिष्ठ नेता एम.के. शेख को कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किया है.
2022 के चुनाव में सत्तारूढ़ BJP ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद 40 में से 20 सीटें जीती थीं. इसका बड़ा कारण रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (आरजीपी), आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मौजूदगी थी. इन दलों ने सत्ता विरोधी वोटों का बंटवारा कर दिया और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया. पाटकर BJP के नीलेश काब्राल से सिर्फ 672 वोटों से हार गए थे क्योंकि आरजीपी और AAP ने सत्ता विरोधी वोटों में सेंध लगाई थी.
AAP ने दो सीटें जीती थीं. बैनाउलिम सीट पर वेंजी विएगास ने पूर्व मुख्यमंत्री चर्चिल अलेमाओ को हराया था जबकि क्रूज सिल्वा ने वेलिम सीट जीती थी. TMC और एमजीपी ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था. TMC को एक भी सीट नहीं मिली जबकि एमजीपी राज्य मंत्रिमंडल में शामिल हो गई.
सितंबर 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत, विपक्ष के नेता माइकल लोबो और पूर्व मंत्री अलेक्सियो सेक्वेरा सहित कांग्रेस के 11 में से 8 विधायक BJP में शामिल हो गए थे. इससे विधानसभा में सत्तारूढ़ दल की स्थिति और मजबूत हुई थी.
अब 15 साल तक विपक्ष में रहने के बाद कांग्रेस को 2027 के चुनाव में अपनी संभावनाएं बेहतर नजर आ रही हैं. विपक्ष को लगता है कि रीजनल प्लान-2021 में बदलाव, कानून-व्यवस्था और रोजगार के अवसरों की कमी जैसे मुद्दों पर बढ़ती नाराजगी का उसे फायदा मिल सकता है. रीजनल प्लान-2021 में बदलाव को लेकर आशंका है कि इससे गोवा में अनियंत्रित विकास का रास्ता खुलेगा और पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचेगा. TMC और AAP के कमजोर पड़ने से भी चुनाव में इन दलों से मिलने वाली चुनौती कम हो सकती है.
गोवा की आबादी में लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला कैथोलिक समुदाय भी कांग्रेस के पक्ष में एकजुट हो सकता है. इस समुदाय की मजबूत मौजूदगी 'ओल्ड कॉन्क्वेस्ट' क्षेत्र में है, जिसमें तिसवाड़ी, बारदेज और साल्सेट शामिल हैं.
दक्षिण गोवा का साल्सेट तालुका 40 विधानसभा क्षेत्रों में से 8 का प्रतिनिधित्व करता है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने दक्षिण गोवा सीट बरकरार रखी थी. इसका बड़ा कारण कैथोलिक समुदाय का एकजुट समर्थन था. साल्सेट में कैथोलिक आबादी करीब 36 प्रतिशत है जबकि मुस्लिम आबादी लगभग 10 प्रतिशत मानी जाती है.

