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निजी लैब कम कीमत में कोरोना जांच करने में कर रहे आनाकानी

यूपी सरकार ने शुल्क कम करने का आदेश जारी कर दिया. अब किट से जांच करने पर निजी पैथोलाजी 2,500 रुपए से ज्यादा शुल्क नहीं ले सकेंगे. लेकिन निजी पैथोलाजी अब जांच से आनाकानी कर रहे हैं.

फोटो प्रतीकात्मक (रॉयटर्स)
फोटो प्रतीकात्मक (रॉयटर्स)
अपडेटेड 28 अप्रैल , 2020

कम कीमत पर निजी पैथोलाजी में कोरोना वायरस की जांच करवाने की प्रदेश सरकार की मंशा पानी फिर गया है. प्रदेश भर में निजी लैब संचालकों ने कम कीमत पर कोरोना जांच करने से हाथ खड़े कर दिए हैं. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने पहले कोरोना वायरस की जांच के लिए 4,500 रुपये तय किया था. जांच पाजिटिव आए या निगेटिव लोगों को पूरा 4,500 रुपए निजी पैथोलाजी को देना पड़ता था. यही नहीं किट से जांच पर भी इतना ही शुल्क लिया जाता था.

इसी बीच 24 अप्रैल को प्रदेश सरकार ने शुल्क कम करने का आदेश जारी कर दिया. इसके तहत अब किट से जांच करने पर निजी पैथोलाजी 2,500 रुपए से ज्यादा शुल्क नहीं ले सकेंगे. इस तरह निजी पैथोलाजी में होने वाली पीसीआर जांच दो भागों में बांटी गई. इसमें पहली जांच करने पर 1,500 रुपए लिए जाएंगे तथा अगर इसकी रिपोर्ट पाजिटिव आई तो अगली जांच के लिए 3,000 रुपए लिए जाएंगे. ऐसे में पहली रिपोर्ट निगेटिव आने पर मरीज को महज 1,500 रुपए ही देने पड़ेंगे. जबकि इससे पहले पहली रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी मरीज को 4,500 रुपए देने पड़ रहे थे.

इस आदेश के आने के बाद निजी पैथोलाजी संचालकों ने सैंपल लेने से आनाकानी करनी शुरू कर दी है. लखनऊ में निरालानगर स्थित एक बड़ी पैथोलाजी ने सैँपल लेना बंद कर दिया है. इससे निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है. गोरखपुर में भी दिल्ली और गुरुग्राम की दो लैब को जांच की अनुमति मिली है. उनके कलेक्शन सेंटर गोरखपुर में हैं. वे 2,500 रुपये में नमूने लेने को तैयार नहीं हैं. निजी डॉक्टरों ने इसकी शिकायत गोरखपुर कमिश्नर और सीएमओ से की है. गोरखपुर के सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने इस पूरे प्रकरण की जानकारी शासन को भेजी है और कार्रवाई के लिए निर्देश मांगे हैं. शासन से निर्देश मिलते ही कोरोना जांच न करने वाली निजी पैथोलाजी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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