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प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री का सिरदर्द होगा दूर

दिल्ली में सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों को पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा ताकि प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री की मुश्किलें खत्म हो सकें

काम की पहल दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों में बदलाव की जानकारी देते हुए
अपडेटेड 9 जून , 2026

दिल्ली में जो लोग घर या दूसरी कोई प्रॉपर्टी खरीदते-बेचते हैं, वे जानते हैं कि सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाकर वहां अपना काम कराना कितनी मुश्किल कवायद है. वहां मामूली-सी शिकायतों तक के लिए घंटों लाइन में लगे रहना, कर्मचारियों की टालमटोल, दलालों का जाल और आखिरकार रिश्वत देने की मजबूरी आम चलन बन चुका है.

राष्ट्रीय राजधानी में सरकारी कामकाज का यह परिदृश्य जल्द ही बदलने वाला है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि दिल्ली के सभी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस पूरी तरह डिजिटल बनाए जाएंगे. इन ऑफिसों को अब पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तरह आधुनिक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से पूरी तरह बदला जाएगा. 

दिल्ली में हर साल लाखों की संख्या में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन होते हैं. हैरानी की बात है कि यहां काम अभी-भी पुराने तरीके से चलता आ रहा है. फाइलें अब भी मैन्युअली चेक होती हैं जिसमें काफी वक्त लगता है. रोहिणी के अजय शर्मा अपनी एक ऐसी ही परेशानी साझा करते हैं, ''मैंने फ्लैट खरीदा तो रजिस्ट्रेशन में तीन महीने लग गए. पांच बार ऑफिस जाना पड़ा. हर बार कोई न कोई कमी निकाल दी जाती थी. आखिर में दलाल को 80,000 रुपए देकर काम कराना पड़ा.''

दिल्ली सरकार की मानें तो नया सिस्टम ऐसी शिकायतों के समाधान के साथ-साथ घर खरीदने-बेचने वालों, बिल्डर्स और मिडिल क्लास परिवारों के लिए गेम चेंजर साबित होगा. अभी-भी रजिस्ट्री ऑफिस के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट का सिस्टम तो है लेकिन तय समय पर जाने के बावजूद घंटों इंतजार करना पड़ता है. नई व्यवस्था में इसे बेहतर बनाया जा रहा है. स्मार्ट टोकन सिस्टम लागू होने के बाद संबंधित व्यक्ति का नंबर आने पर मोबाइल पर नोटिफिकेशन मिलेगा.

एआइ आधारित फेशियल रिकग्निशन से यह पक्का होगा कि असली मालिक या खरीदार ही मौजूद है, कोई फर्जी व्यक्ति रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में शामिल नहीं है. सरकार का दावा है कि ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से प्रॉपर्टी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो जाएगी. दिल्ली सरकार के अधिकारियों का यह भी कहना है कि इससे प्रॉपर्टी से जुड़े झगड़ों में भी कमी आएगी. सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने से ज्यादा राजस्व मिलेगा क्योंकि अंडर-वैल्यूएशन का खेल खत्म हो जाएगा.

इस पहल के बारे में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कहती हैं, ''दिल्ली को विश्व स्तरीय सुविधाएं देने का हमारा प्रयास है. सब-रजिस्ट्रार ऑफिस अब नागरिकों की सेवा का केंद्र बनेंगे, न कि परेशानी का.'' दिल्ली सरकार में काम कर रहे सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह सुधार केंद्र सरकार की ई-गवर्नेंस नीति और अन्य राज्यों के सफल मॉडल से प्रेरित है. उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में डिजिटल रजिस्ट्रेशन से अच्छे नतीजे आए हैं. 

हालांकि, इस पहल के सफल क्रियान्वयन की राह में चुनौतियां भी कम नहीं हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी कर्मचारी पुरानी व्यवस्था के आदी हैं. उनकी मानसिकता बदलना मुश्किल काम है और उन्हें नई टेक्नॉलोजी की ट्रेनिंग भी देनी होगी. विपक्ष की अपनी आशंकाएं हैं. दिल्ली प्रदेश में मुख्य विपक्षी आम आदमी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि यह योजना भी भाजपा सरकार की पहले की कई घोषणाओं की तरह जमीन पर लागू नहीं हो पाएगी. वहीं कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि आम लोगों के लिए भी सरकार की तरफ से ट्रेनिंग कैंप लगाए जाएं ताकि बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोग भी नई व्यवस्था का फायदा ले सकें.

इस तरह की फिक्र और आशंकाएं अपनी जगह. दिल्ली सरकार की इस पहल को रजिस्ट्री प्रक्रिया में डिजिटल क्रांति लाने वाला एक कदम माना जा रहा है. यह इस मायने में भी काफी अहम है कि इसके साथ दिल्ली के बाकी सरकारी ऑफिसों को भी विकसित देशों की राजधानियों की तरह विश्वस्तरीय बनाने का सिलसिला शुरू होगा.

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