लोगों की मदद करने में फिसड्डी अधिकतर जनप्रतिनिधि
कोरोना संकट की वजह से लॉक डाउन के बीच विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों की मदद करने में ज्यादातर प्रतिनिधि फिसड्डी साबित हो रहे हैं.

कोरोना संकट की वजह से लॉक डाउन के बीच विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों की मदद करने में ज्यादातर प्रतिनिधि फिस्ड्डी साबित हो रहे हैं. लोकसभा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक फंसे हुए प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए बने कंट्रोल के संज्ञान में बहुत कम मामले लाए जा रहे हैं.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गत सप्ताह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए राज्य के विधानसभा अध्यक्षों से बात कर उन्हे विधानसभा मेैं एक कंट्रोल रूम बनाने का आग्रह किया था.
सभी राज्यों ने कंट्रोल रूम बना भी लिए. मकसद यह था कि हर राज्य के विधानसभा में स्थापित कंट्रोल रूम तक विधायक यह जानकारी देंगे कि उनके विधानसभा के कितने मजदूर या दूसरे लोग किसी दूसरे राज्य में फंसे हैं और संबंधित राज्य के किस हिस्से में हैं. यह जानकारी कंट्रोल रूम को मिलते ही उस राज्य के कंट्रोल रूम से उस दूसरे राज्य से संपर्क कर यह सूचित किया जाएगा कौन मजदूर कहां फंसा है. मसलन यदि बिहार के जाले विधानसभा के विधायक, बिहार विधानसभा में स्थापित कंट्रोल रूम को यह जानकारी देते हैं कि, उनके विधानसभा के 10 मजदूर कर्नाटक के उडुपी विधानसभा में फंसे हैं तो बिहार विधानसभा में स्थापित कंट्रोल रूम से कर्नाटक विधानसभा के कंट्रोल रूम को यह जानकारी दी जाती ताकि उनकी मदद हो सके. यदि मामला सांसदों का है तो उसके लिए लोकसभा में स्थापित कंट्रोल रूम को सूचित किया जाता.
सूत्रों का कहना है कि कंट्रोल रूप की व्यवस्था तो हो गई और कुछ राज्यों से कंट्रोल रूम को जानकारी भी मिली लेकिन बाद में कंट्रोल रूम से ऐसी जानकारी इक्के-दुक्के ही मिल रही है. ऐसे में फंसे हुए लोगों की पुख्ता जानकारी नहीं होने से उन्हे मदद नहीं मिल पा रही है.
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