...या यूं ही छांट लेंगे
कांग्रेस के जी-23 बागियों की प्रमुख मांग थी कि कार्य समिति के सदस्यों का चुनाव हो. अब इसका अंदाज लगा पाना मुश्किल है कि खड़गे कार्यसमिति सदस्यों के चुनाव वाले ढर्रे पर लौटेंगे या नहीं

कांग्रेस में पार्टी की सर्वोच्च निर्णायक संस्था—कांग्रेस कार्य समिति की प्रतिष्ठापूर्ण सदस्यता के लिए पार्टी के भीतर लॉबीइंग का दौर तेज हो गया है. आगामी फरवरी में रायपुर में होने जा रही अगली वार्षिक बैठक तक पार्टी को नई कार्य समिति का गठन करना होगा. यह प्रक्रिया मल्लिकार्जुन खड़गे के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने के बाद रोक दी गई थी. पार्टी के संविधान के अनुसार, कार्यसमिति के 23 में से 12 सदस्य निर्वाचित होने चाहिए, लेकिन सोनिया गांधी और राहुल गांधी की अध्यक्षता के दौरान नामांकन के जरिए ही ये जगहें भरी जाती थीं. कांग्रेस के जी-23 बागियों की प्रमुख मांग थी कि कार्य समिति के सदस्यों का चुनाव हो. अब इसका अंदाज लगा पाना मुश्किल है कि खड़गे कार्यसमिति सदस्यों के चुनाव वाले ढर्रे पर लौटेंगे या नहीं. उनके रवैए पर कई लोग उस तरह से भरोसा करने को तैयार नहीं जैसा कि वे गांधी परिवार पर करते थे.
वादा कर दिए थे, यूं ही!
नवंबर 2020 में बिहार में विधानसभा चुनावों के दौरान तेजस्वी यादव ने राज्य में 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. केवल यही नहीं, उनके इस ऐलान ने भी मतदाताओं का ध्यान आकर्षित किया था कि नई भर्तियों के लिए अगर जरूरत पड़ी तो वे विधायकों के वेतन को भी रोक देंगे. दो साल बाद अब जिस महागठबंधन सरकार में वे उपमुख्यमंत्री हैं, उसने विधायकों और एमएलसी के वेतन में वृद्धि कर दी है. वहीं, विपक्षी भाजपा विरोध प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों की नौकरियों के उम्मीदवारों का समर्थन तो कर रही है, लेकिन वह भी विधायकों के वेतन को बढ़ाने के फैसले का विरोध करने से कतरा रही है.
प्रबुद्ध सम्मेलन का राज
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों धुआंधार प्रबुद्ध सम्मेलन कर रहे हैं. पिछले दो हक्रते के दौरान 12 नगर निगमों में पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी वहां अलग-अलग वर्गों के प्रबुद्ध लोगों की मौजूदगी में अपनी सरकार की उपलब्धियों का बखान कर चुके हैं. असल में प्रबुद्ध सम्मेलनों के जरिए योगी शहरी इलाकों में भारतीय जनता पार्टी की पैठ को और ज्यादा मजबूत करना चाहते हैं. इसी मजबूती के जरिए योगी आदित्यनाथ स्थानीय निकाय चुनावों में प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों में कमल खिलाकर एक और रिकॉर्ड अपने नाम करना चाहते हैं.
चौंकने को रहें तैयार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राजस्थान के लिए क्या योजना है? यहां की भाजपा इकाई में मुख्यमंत्री पद के करीब आधा दर्जन उम्मीदवार हैं, पर 2023 में जीत का भरोसा दिलाने वाला कोई नहीं है. दिसंबर में राज्य इकाई में बदलाव के संकेत मिल सकते हैं. मोदी-शाह की जोड़ी चुनावी जंग में पार्टी का नेतृत्व करने का जिम्मा चौंकाते हुए किसी कम चर्चित शख्स को दे सकती है. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अर्जुन मेघवाल तथा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को कुछ खास जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी. इस जगह पर नजर गड़ाए रखिएगा.
थोड़ा सब्र रख लेते
राजस्थान में राहुल गांधी की यात्रा के दाखिल होते ही राज्य के कांग्रेस नेताओं में उनके साथ चलने की होड़ मच गई. झालावाड़ जिले से यात्रा शुरू होने के बाद जयपुर के आदर्श नगर के विधायक रफीक खान उनके साथ चलते हुए उनसे बात करने की कोशिश करने लगे. किसी और से बात कर रहे राहुल को उनका बीच में टोकना रास नहीं आया. उन्होंने खान को फटकार दिया. इसका ऐसा असर हुआ कि राहुल से मिलने को बेताब कई नेता उनसे दूरी बनाकर रख रहे हैं.
—साथ में अमिताभ श्रीवास्तव, रोहित परिहार, आशीष मिश्र और आनंद चौधरी